आओ हम सब कर लें योग,
तन व मन को करें निरोग।
चिंता की भित्ति को तोड़ें,
प्राणायाम से मुंँह ना मोड़ें।

देश हमारा पहला ऐसा,
योग की महता को बतलाया।
पूरा विश्व अनुकरण करता,
सबने इसको है अपनाया।

इसने गहा है अद्भुत शक्ति,
पूजा सम हम करलें भक्ति।
पाएंँगे उत्तम परिणाम,
जीवन होगा अविरल, अभिराम।

तन सा ना कोई धन-संपत्ति,
योग ही इसको संँजोता है।
उत्तम स्वास्थ्य के फल लगते हैं,
योग बीज जो बोता है।

लद्दाख हो या हो सहारा,
योग बिना ना कहीं गुज़ारा।
जिसके पौ हैं इससे फटते,
रोग- व्याधि ना वहाॅं फटकते।

आत्मा- परमात्मा का मेल कराता,
मस्तिष्क को शरीर बड़ा है भाता।
सुसंस्कृत, समुन्नत बनता व्यक्तित्व,
अपयश कभी इसको नहीं सुहाता।

मानव ,योग से अलग न होना,
वरना पड़ जाएगा रोना।
मानव का उद्धार न होगा,
शुद्ध, सात्विक विचार न होगा।

जाति -धर्म की तोड़ दीवारें,
योग दिवस सब मिलकर,
मनाएंँ।
दुरुस्त करें आचार- विचार को,
जग को इसकी महिमा समझाएंँ।

साधना शाही वाराणसी

By Sadhana Shahi

A teacher by profession and a hindi poet by heart! Passionate about teaching and expressing through pen and words.

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